देशभर में फैलती ऐसी घटनाएं, रिश्तों में जहर या सोच में खामी, इकबाल खान, बीकानेर
देशभर में फैलती ऐसी घटनाएं, रिश्तों में जहर या सोच में खामी
पत्रकार इकबाल खान बीकानेर,मेरी खबरें अब सिर्फ बीकानेर या राजस्थान तक सीमित नहीं रही, बल्कि छत्तीसगढ़, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, केरल, उत्तराखंड, हरियाणा सहित देश के कई राज्यों के व्हाट्सऐप ग्रुपों में पढ़ी जा रही हैं। ऐसे में जो मैं लिखता हूं, उसका असर भी सीधे लोगों की सोच पर पड़ता है,इसलिए आज एक जरूरी बात साफ करना चाहता हूं।कोरबा जैसी घटनाएं सिर्फ एक जिले की खबर नहीं होती, ये पूरे देश के लिए आईना होती हैं। रिश्तों में शक, अविश्वास, सोशल मीडिया की दखल ये सब आज परिवारों को तोड़ रहे हैं। लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि इंसान गुस्से में आकर हत्या जैसे कदम उठा ले।अगर आप महिला हैं, आपके बच्चे हैं और आपका पति किसी और से बात करता है,या किसी ओर महिला के साथ रहने लगा है,तो घबराइए मत, समय के साथ वो वापस घर आजाएगा, बस आपको सब्र से काम लेना है। आदमी अपने परिवार की जिम्मेदारी समझता है।इसी वजह से एक न एक दिन वो घर वापस आ जाता है , वहीं अगर आप पुरुष हैं और आपकी पत्नी किसी और से बात करती है, तो उसे समझाने की कोशिश करें, लेकिन हाथ उठाना या हत्या करना कोई रास्ता नहीं है। आज कल सोशल मीडिया पर कुछ लोग उल्टी सलाह देते हैं ,कहते भाई वो आपको छोड़े या मारे नीले ड्रम में डाले उससे पहले आप उसे खत्म कर दो।ये भी सच है मुस्कान जैसी लड़कियों ने बहुत से लड़कों की हत्या भी की है,लेकिन ये सोच सीधी जेल का रास्ता है। जो लोग ऐसी बातें करते हैं, उन्हें कानून की हकीकत नहीं पता एक बार अपराध किया तो जिंदगी भर पछताना पड़ेगा। एक कहावत है मर्द हाथ छोड़कर जाना चाहे तो उसे रोक लो क्योंकि वो रुक जाएगा। लेकिन,अगर कोई महिला आपका हाथ छोड़कर जाना चाहतीहै, तो उसे रोको मत क्योंकि वो पहले ही जा चुकी होती है । हालांकि में ऐसी कहावतों पर विश्वास नहीं करता,फिर भी वो जाना चाहती है तो उसे जाने देना ही समझदारी है। क्योंकि हत्या करके आप उसे नहीं रोक सकते, बल्कि अपनी जिंदगी भी खत्म कर लेते हैं।आज समाज में डर दोनों तरफ है,कहीं महिला द्वारा प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या, तो कहीं पुरुष द्वारा पत्नी की हत्या। लेकिन इसका हल डर या हिंसा नहीं, बल्कि समझ और कानून का सम्मान है।मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं,रिश्ते जबरदस्ती नहीं चलते। अगर कोई साथ नहीं रहना चाहता, तो उसे आजाद कर दो… क्योंकि हत्या करने से सिर्फ एक इंसान नहीं मरता, दो जिंदगियां खत्म हो जाती है एक उसकी, और एक आपकी।

