जब सुप्रीम कोर्ट में तय हुआ कि टमाटर फल है या सब्जी
पत्रकार इकबाल खान बीकानेर,दुनिया में शायद ही कोई ऐसा खाद्य पदार्थ होगा जिस पर उतनी बहस हुई हो, जितनी टमाटर पर। यह बहस केवल रसोई तक सीमित नहीं रही, बल्कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई। सवाल था क्या टमाटर फल है या सब्जी?यह मामला वर्ष 1887 में शुरू हुआ। न्यूयॉर्क के व्यापारी जॉन निक्स और उनकी कंपनी ने वेस्ट इंडीज से टमाटर आयात किए। उस समय अमेरिका के टैरिफ कानून, यानी आयात शुल्क कानून, के अनुसार सब्जियों पर कर लगता था, जबकि फलों पर नहीं।बंदरगाह के कलेक्टर एडवर्ड हेडन ने टमाटरों को सब्जी मानते हुए उन पर आयात शुल्क लगा दिया। व्यापारियों ने इसका विरोध किया और अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि वनस्पति विज्ञान के अनुसार टमाटर एक फल है, क्योंकि यह फूल से विकसित होता है और इसके भीतर बीज होते हैं। इसलिए उस पर कर नहीं लगना चाहिए।
मामला अंतत अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। दोनों पक्षों ने शब्दकोशों की परिभाषाएं और विशेषज्ञों की राय अदालत के सामने रखी। अदालत ने माना कि वैज्ञानिक दृष्टि से टमाटर वास्तव में फल है, लेकिन कानून का उद्देश्य वैज्ञानिक वर्गीकरण नहीं, बल्कि सामान्य लोगों की समझ और व्यापारिक व्यवहार को देखना है।
10 मई 1893 को न्यायमूर्ति होरेस ग्रे की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि आम जीवन में टमाटर का उपयोग भोजन में सब्जी की तरह किया जाता है। इसे मुख्य भोजन के साथ खाया जाता है, जबकि फल सामान्यत मिठाई या अलग खाद्य पदार्थ के रूप में खाए जाते हैं। इसलिए टैरिफ कानून के लिए टमाटर को सब्जी माना जाएगा।इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत यह था कि किसी कानून में प्रयुक्त सामान्य शब्दों का अर्थ वैज्ञानिक पुस्तकों से नहीं, बल्कि आम बोलचाल और सामान्य उपयोग से तय किया जाएगा। यही कारण है कि अदालत ने शब्दकोशों को केवल सहायक सामग्री माना, अंतिम प्रमाण नहीं।आज भी यह फैसला दुनिया के सबसे चर्चित कानूनी मामलों में गिना जाता है। कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों को यह मामला इसलिए पढ़ाया जाता है क्योंकि इससे यह सिद्धांत स्थापित हुआ कि किसी शब्द का अर्थ उसके संदर्भ और सामान्य उपयोग के आधार पर भी तय किया जा सकता है।रोचक बात यह है कि आज भी विज्ञान की किताबें टमाटर को फल मानती हैं, लेकिन रसोई, बाजार और कई कानूनी संदर्भों में उसे सब्जी ही माना जाता है। इस तरह टमाटर एक ऐसा खाद्य पदार्थ बन गया जिसने विज्ञान और कानून दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई।

