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बीकानेर उज्ज्वला योजना गैस एजेंसी के रवैये से उपभोक्ता परेशान,झगड़े के वीडियो वायरल

उज्ज्वला योजना पर उठे सवाल, गैस एजेंसी के रवैये से उपभोक्ता परेशान

पत्रकार इकबाल खान बीकानेर 
बीकानेर शहर की व्यास कॉलोनी थाना क्षेत्र के सामने स्थित उज्ज्वला गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रधानमंत्री की के तहत गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन देकर धुएं और प्रदूषण से राहत दिलाने का उद्देश्य रखा गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर योजना कमजोर पड़ती नजर आ रही है।स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस बुकिंग के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा। आरोप है कि ओटीपी आने और बुकिंग कन्फर्म होने के बावजूद एक-एक हफ्ते तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं होती। जब उपभोक्ता एजेंसी पर पहुंचते हैं तो उन्हें घर पर डिलीवरी का हवाला देकर लौटा दिया जाता है।

बताया जा रहा है कि डिलीवरी कर्मी उपभोक्ता को केवल एक बार फोन करते हैं और संपर्क न होने पर दोबारा प्रयास नहीं करते, जिससे लोगों को बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। खासकर कम पढ़े-लिखे और गरीब वर्ग के लिए यह प्रक्रिया बड़ी परेशानी बन गई है।

एजेंसी,ऑफिस, उपभोक्ताओं को हैंडल करने वाले आनंदकुमार पर भी उपभोक्ताओं से अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। लोगों का कहना है कि उनकी बात करने की शैली और रवैया ठीक नहीं है, जिससे उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। इस आनंदकुमार के  कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है।

उपभोक्ताओं ने यह भी बताया कि सरकारी नियमों के अनुसार घरेलू गैस सिलेंडर 25 दिनों के भीतर मिल जाना चाहिए, लेकिन वास्तविकता में 30 से 35 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। कभी केवाईसी, कभी ओटीपी और कभी ऐप के जरिए बुकिंग जैसी प्रक्रियाएं आम लोगों के लिए जटिल साबित हो रही हैं।इस पूरे मामले में कई उपभोक्ताओं ने सरकार के प्रति भी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि अच्छी योजना होने के बावजूद उसकी निगरानी और क्रियान्वयन में कमी के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, कई उपभोक्ताओं ने इसकी शिकायत 181 सरकारी हेल्पलाइन और संबंधित रसद विभाग में भी दर्ज कराई है ओर वीडियो भी वायरल , लेकिन  कार्यवाही शायद नहीं हुई,स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और योजना का लाभ सही मायनों में जरूरतमंदों तक पहुंचे।आईरा समाचार के  चीफ एडिटर ने खुद एजेंसी में जाकर पड़ताल की बातचीत से पता चला उसका घमंड सार्वजनिक  एजेंसी में बिठाने लायक नहीं है वो व्यक्ति सही ढंग से किसी से बात तक नहीं करता, वो बात करते वक्त उपभोक्ता की तरफ देखता  भी नहीं है। बस वेअपने मोबाइल में व्यस्त रहते है। हालांकि काफी लोगों ने इसकी व्यक्ति की शिकायत की देखते है कब तक कार्यवाही होती है।

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