न्याय के मंदिरों में इंसाफ की आस क्यों डगमगा रही है एक वकील की गुहार
आईरा समाचार इकबाल खान,न्याय के मंदिरों में भी इंसाफ डगमगाने और हिचकोले खाने लग रहा है मजलूम फरियादी इंसाफ की गुहार लगाते हुए दुखी होकर अपने मालिक के आगे न्याय की भीख मांगने को मजबूर हो रहा है ।देश की ज्यूडिशियल अदालतों में 5 करोड़ मुकदमे और 5 करोड़ ही मुकदमे देश की रेवेन्यू अदालतों में लंबित पड़े हैं।
क्या जिलों की बार एसोसिएशन को इस पर गंभीरता से विचार नहीं करना चाहिए? कुछ समय पहले हमने Lawyer Foundation Regally Legal से संबंधित महिला ऐडवोकेट मिस अभया शर्मा द्वारा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन वेद प्रकाश शर्मा से लिए गए इंटरव्यू को सोशल मीडिया पर देखा।इंटरव्यू के वीडियो में मिस अभया शर्मा ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के चेयरमैन सीनियर एडवोकेट श्री के.के. मेनन ने एक मीटिंग में बयान दिया है कि देश के 90 प्रतिशत लोअर ज्यूडिशियरी में करप्शन है।इस पर श्री वेद प्रकाश शर्मा ने सवाल किया कि हायर ज्यूडिशियरी के क्या हालात हैं। क्या देश की हायर अदालतें करप्शन मुक्त हैं।ध्यान रहे कि एक अरसा पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश के सरकारी आवास में स्थित सर्वेंट क्वार्टर में करोड़ों रुपये के नोटों में आग लग गई थी, जिसे पूरी दुनिया ने देखा है, लेकिन इसके बाद क्या हुआ।क्या संबंधित जस्टिस के विरुद्ध कोई एक्शन हो गया?
केवल उन जज महोदय का ट्रांसफर करके उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में भेज दिया गया।श्री वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि सन 2004 में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस एस.पी. भरूचा ने बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा दिए गए फेयरवेल प्रोग्राम में स्पष्ट रूप से अपनी स्पीच में कहा था कि देश के 25 प्रतिशत लोअर ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार है।
वेद प्रकाश शर्मा ने सवाल किया कि दलाल, टाउट और फिक्सर्स कौन हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि ये फिक्सर्स भी तो हमारे ही बीच के, हमारे ही साथ के लोग हैं, जिनमें बहुत से सारे लोग चुनाव लड़कर आ जाते हैं।लेकिन यह बहुत खतरनाक हो रहा है, जनता के बीच अदालतों पर विश्वास हिचकोले खाने लग रहा है।इंसाफ न मिल पाने और अदालतों पर फेथ खत्म हो जाने के कारण आम अवाम अदालतों के बजाय गुंडे-बदमाशों के पास जाकर मामला निपटा लेने के चक्कर में घूमने लग रहा है।ज्यूडिशियरी के साथ ही यदि रेवेन्यू अदालतों के हालात पर गौर करें तो वहां पर तो करप्शन के सारे रिकॉर्ड टूटते जा रहे हैं।रेवेन्यू एडवोकेट्स के बीच चर्चा आम हो रही है कि रेवेन्यू अधिकारियों द्वारा तो केस में बोली लगाई जाने लगी है कि जो अधिक देगा तो फैसला उस पक्षकार के फेवर में कर दिया जाएगा।कई बड़े रेवेन्यू अधिकारियों की शिकायतें ऐसी भी आ रही हैं कि उनकी अदालतों में दावे की बहस तो सुन ली जाती है और उसके बाद पक्षकार का इंतजार किया जाता है, और यदि कोई पक्षकार उस अधिकारी के पास नहीं पहुंचता तो फैसले को पेंडिंग रख दिया जाता है।गरीब मजलूम व्यक्ति इंसाफ की गुहार आखिर किसके आगे करे।विचारणीय विषय यह है कि कोई एक अकेला वकील या पीड़ित गरीब आदमी ऐसे अधिकारियों की शिकायत भी तो नहीं कर सकता।यह वकीलों के एसोसिएशन की ड्यूटी है कि सामूहिक रूप से ऐसे करप्शन के खिलाफ एक्शन लें, और ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की खैर-खबर लें।आज से 16 साल पहले सन 2009 में बीकानेर शहर के वकील समुदाय ने बीकानेर शहर में हाई कोर्ट बेंच स्थापित करने का आंदोलन किया था।कितने अफसोस की बात है कि हम हर महीने की 17 तारीख को अदालतों के कार्य सस्पेंड करने और केवल मात्र प्रशासन को ज्ञापन देकर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा होना मान लेते हैं।करीबन 200 दफा हमने राजस्थान सरकार को ज्ञापन दे दिया है।दो मर्तबा देश के सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई बीकानेर आ गए और कुछ नहीं हुआ।आखिरकार पिछले दिनों देश के सीजेआई बी.आर. गवई ने कहा था कि हमारे हाथ में कुछ नहीं है। राजस्थान उच्च न्यायालय और राजस्थान सरकार द्वारा हाई कोर्ट बेंच का प्रस्ताव भेजा जाना आवश्यक है।कितनी अजीब सच्चाई है कि पिछले 16 साल से वकीलों द्वारा सांकेतिक आंदोलन किया जा रहा है और आज तक राजस्थान सरकार तथा राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया है।बीकानेर शहर के वकील साहबान को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
मोहब्बत अली तंवर, एडवोकेट आम अवाम के लिए बीकानेर!

