इंसानों की भीड़ में अकेलापन, बेजुबानों में सुकून एक पत्रकार की आत्मकथा
इंसानों की भीड़ में अकेलापन, बेजुबानों में सुकून एक पत्रकार की आत्मकथा
पत्रकार इकबाल खान,भीड़ हमेशा साथ नहीं होती, और अकेलापन हमेशा कमजोरी नहीं होता ये बात मुझे जिंदगी ने सिखाई है। पिछले 15 सालों से मैं पत्रकारिता के मैदान में हूँ। 16 हजार से ज्यादा खबरें लिख चुका हूँ, जिनमें से कई ने सिस्टम को आईना दिखाया, तो कई ने गरीब और बेबस लोगों की आवाज बनकर उनके हक की लड़ाई लड़ी। लेकिन सच लिखने की इस राह में जितनी लड़ाई बाहर थी, उससे कहीं ज्यादा अंदर भी थी। मैंने रिश्तों को हमेशा दिल से निभाया। दोस्ती मेरे लिए सिर्फ शब्द नहीं, एक जिम्मेदारी थी। लेकिन समय के साथ ये समझ आया कि हर कोई उस जिम्मेदारी को समझने वाला नहीं होता। जिन पर भरोसा किया, उन्हीं से धोखा मिला। जिनके लिए खड़ा रहा, वही वक्त आने पर दूर हो गए।ये अनुभव किसी भी इंसान को तोड़ सकते हैं,और मुझे भी तोड़ा। लेकिन मैंने टूटकर बिखरने के बजाय खुद को बदल लिया।आज मैं बहुत कम लोगों से मिलता हूँ, बहुत कम बात करता हूँ। फोन की घंटी अब पहले जैसी मायने नहीं रखती। भीड़ से दूरी बना ली है, क्योंकि वहां अक्सर चेहरे ज्यादा होते हैं, लेकिन सच्चाई कम। लेकिन इस दूरी ने मुझे खाली नहीं किया बल्कि मुझे एक नई दुनिया से जोड़ दिया।पिछले 10 सालों से मैं स्ट्रीट डॉग और गायों के बीच वक्त बिता रहा हूँ। इन बेजुबानों के साथ एक अलग ही रिश्ता बन गया है। यहां कोई दिखावा नहीं, कोई झूठ नहीं, कोई स्वार्थ नहीं। सिर्फ एक सच्चा जुड़ाव, जो बिना शब्दों के भी सब कुछ कह देता है।जब एक भूखा कुत्ता आपके हाथ से रोटी खाकर पूंछ हिलाता है, या एक गाय आपको पहचान कर आपके पास आ जाती हैतो वो एहसास किसी भी इंसानी रिश्ते से कम नहीं होता। बल्कि कई बार उससे कहीं ज्यादा सच्चा होता है। मैं ये नहीं कहता कि हर इंसान गलत है। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि जिंदगी ने मुझे अब लोगों को परखना सिखा दिया है। अब रिश्ते कम हैं, लेकिन जो हैं, वो सच्चे हैं।
फोटो पत्रकार इकबाल खान
मेरी ये कहानी किसी से शिकायत नहीं, बल्कि एक सच्चाई है। एक ऐसा सच, जिसे कई लोग महसूस करते हैं, लेकिन कह नहीं पाते।अगर आप भी कभी भीड़ में अकेलापन महसूस करते हैं, तो एक बार इन बेजुबानों के बीच बैठकर देखिए,शायद आपको भी वही सुकून मिल जाए, जो मुझे मिला।क्योंकि कभी-कभी इंसानों से दूर जाकर ही इंसान खुद को करीब से समझ पाता है।


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