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1957 में मानवता ने एक अद्भुत और बहादुर साथी लाइका को अंतरिक्ष की सीमा पर भेजा था,जिसका वापसी का कोई रास्ता नहीं था,

आईरा इकबाल खान ,1957 में मानवता ने एक अद्भुत और बहादुर साथी को अंतरिक्ष की सीमा पर भेजा लाइका, पहली मादा कुत्ता।लाइका को एक ऐसे मिशन पर भेजा गया था, जिसमें वापसी का कोई रास्ता नहीं था। वह एक छोटा, प्यारा कुत्ता था, जिसे सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रम ने रॉकेट में बैठाकर पृथ्वी की कक्षा में भेजा। उसका यह मिशन न केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि थी बल्कि एक भावुक श्रद्धांजलि भी थी, जिसने मनुष्यता को अपने सीमाओं से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।हालांकि लाइका पृथ्वी पर वापस नहीं आ सकी, पर उसके बलिदान ने हमें अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने का रास्ता दिखाया। उसकी हिम्मत और त्याग को आज भी याद किया जाता है, जो एक प्यारे जीवन से बढ़कर मानवता के लिए दिये गए एक उपहार की तरह है।मनवता सदैव उस बहादुर आत्मा के बलिदान को याद रखेगी, जिसने हमें अनजान आकाश की ओर पहला कदम बढ़ाने में मदद किया।”

यह तस्वीर उस बहादुर लाइका की एक झलक दिखाती है, जिन्होंने इतिहास लिखा।

वह पहली अंतरिक्ष यात्री कुतिया थी, जिसे 1957 में स्पुतनिक-2 में भेजा गया था। लाइका की आम पहचान सफेद-कालापन रंग, छोटी कद और भूरी मुख वाली एक मिक्स-ब्रीड कुत्ती के तौर पर होती है

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