भाजपा में पहली बार टिकट वितरण पर इस तरह का गुस्सा फूटा है। कइयों ने पार्टी छोड़ कांग्रेस पकड़ ली तो कईयों ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।
बगावत से अछूता नहीं बीकानेर भी बागी खड़े हुए तो बदलेगी चुनावी तस्वीर ,मधु आचार्य (आशावादी)
आईरा समाचार बीकानेर। इस बार विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के बाद जिस तरह का असंतोष भाजपा व कांग्रेस को झेलना पड़ रहा है, वैसा पहले कभी नहीं सहना पड़ा। भाजपा जिसे कैडर बेस पार्टी कहा जाता है, उसमें तो पहली बार टिकट वितरण पर इस तरह का गुस्सा फूटा है। कइयों ने पार्टी छोड़ कांग्रेस पकड़ ली तो कईयों ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। भाजपा प्रदेश कार्यालय पर इस बार जैसा विरोध प्रदर्शन हुआ, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। कांग्रेस भी इससे अछूती नहीं रही। उसमें भी असंतोष चरम पर है। कई दल छोड़ गये तो कई बागी होकर लड़ रहे हैं। इस स्थिति से दोनों राजनीतिक दल परेशान है और डेमेज कंट्रोल के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं।अन्य जिलों की तुलना में बीकानेर जिला अपेक्षाकृत शांत रहता है। विरोध के बड़े प्रदर्शन नहीं होते। भाजपा में तो विरोध भी दबे स्वर होता था। कांग्रेस में डेमेज कंट्रोल भी जल्दी हो जाया करता था। मगर इस बार यहां भी सूरत बदली हुई है और दोनों दलों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बीकानेर पूर्व में भाजपा की परेशानी :
बीकानेर पूर्व में भाजपा ने तीन बार की विधायक सिद्धि कुमारी को फिर टिकट दिया। वे स्थानीय राजनीति में कम ही दखल देती है। तीन बार टिकट मिला तो कोई विरोध नहीं हुआ। मगर इस बार उनके टिकट के विरोध में महावीर रांका व सुरेंद्र सिंह शेखावत उतर आये। रांका ने बड़ा प्रदर्शन भी किया। इन दोनों का अगला कदम क्या होगा, ये स्पष्ट नहीं। मगर उनके तेवर तो ऐसे नहीं लगते कि सब कुछ सही होगा। दोनों ने अपने समर्थको से चर्चा के बाद अगला कदम उठाने का कहा है।बीकानेर पश्चिम में कांग्रेस से बड़ी बगावत :
: पश्चिम में राजकुमार किराडू ने बगावत की है और पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस के विरोध की भी बात कही है। कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता अब्दुल मजीद खोखर ने तो पद से इस्तीफा देने के साथ ही बी.डी.कल्ला के सामने चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम मुस्तफा, अनवर अजमेरी ने भी पदों से इस्तीफा दे चुके है। अपना दर्द भी साझा किया है।
लूणकरणसर में बेनीवाल समर्थक उग्र :लूणकरणसर में वीरेंद्र बेनीवाल के समर्थक भी सड़क पर उतर आये हैं।
उन्होंने टिकट घोषित होने से पहले ही प्रदर्शन किया और विरोध में नारे लगाये। बेनीवाल खुद राजनीति में सॉफ्ट चेहरा माने जाते है। ऐसे उग्र प्रदर्शनों के हिमायती नहीं है। इसके बावजूद यह प्रदर्शन बताता है की आक्रोश बहुत ज्यादा है।
खाजूवाला से टिकट नहीं मिला तो कांग्रेस छोड़ गए रेवंतराम :
पूर्व विधायक रेवंतराम ने खाजूवाला से टिकट मांगा, मिला नहीं। उन्होंने भी पार्टी छोड़ रालोपा का दामन थाम लिया। रालोपा ने उनको कोलायत से उम्मीदवार बना दिया है। जाहिर है नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ेगा। सामान्य सीट पर एससी के आने से वोटों का गणित गड़बड़ायेगा।
पिक्चर अभी बाकी है।शुरुआती रुझान दोनों दलों में जबरदस्त असंतोष के है। कुछ रूठे हुए ऐसे भी है जो एकबारगी मानकर प्रत्याशी को माला पहना चुके हैं लेकिन भीतर का दर्द उन्हें साल रहा है। ऐसे में कुल मिलाकर असंतुष्ट व बागी सभी सीटों पर कुछ न कुछ असर डालेंगे, जिससे चुनावी गणित भी बदलेगी।

