बीकानेर पश्चिम सीट पर ‘कल्ला को घर में घरेने की तैयारी,
आईरा समाचार बीकानेर। विधानसभा चुनावों की जंग के लिये बीकानेर पश्चिम सीट की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। इस सीट पर अबकी दफा भी भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होगा। इस मुकाबले के लिये कांग्रेस ने फिर लगातार डॉ.बीडी कल्ला और भाजपा ने हिन्दुत्व कार्ड खेलते हुए नये चेहरे के तौर पर जेठानंद व्यास को मैदान में उतारा है। इस बीच टिकट से वंचित रहे कांग्रेस के असंतुष्टों ने इस बार डॉ.कल्ला को घर में ही घरेने की तैयारी शुरू कर दी है। इनमें कांग्रेस टिकट के प्रमुख दावेदार रहे राजकुमार किराडू तो खुलकर मैदान में भी आ गये है। किराडू ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर अपनी नाराजगी जताते हुए खुले आम बगावत और डॉ.कल्ला को हराने का चैलेंज भी दे दिया है। इधर,कांग्रेस में पिछले पांच साल से उपेक्षा का दंश झेल रही पार्टी की मुस्लिम लॉबी ने भी अपना बागी प्रत्याशी मैदान में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। अगर इस सीट पर कोई दमदार मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतरा तो डॉ.कल्ला के लिये बड़ा खतरा साबित हो सकता है,क्योंकि पिछला चुनावा डॉ.कल्ला ने मुस्लिम वोट बैंक के दम पर ही जीता था ।
अब तो हराकर ही दम लूंगा-किराडू
जानकारी में रहे कि बीकानेर पश्चिम सीट से टिकट इस बार डेढ दर्जन नेताओं ने दावेदारी की थी,इनमें राजकुमार किराडू का नाम प्रमुखता से चल रहा था। अटकलें लगाई जा रही थी कि अगर पार्टी टिकट में बदलाव करेगी तो किराडू को टिकट मिलना तय है, लेकिन कांग्रेस ने तमाम तरह की सर्वे रिपोर्ट और दावेदारों को नजर अंदाज कर डॉ.कल्ला को लगातार दसवीं बार मैदान में उतार दिया और इसके साथ ही शहर के कांग्रेस हल्कों में आक्रोश का बवंडर उठना शुरू हो गया। आक्रोश के इस बवंडर में सबसे पहले सामने आये राजकुमार किराडू ने अपने समर्थकों के साथ विरोध दर्ज कराने के साथ खुला चैलेंज कर दिया कि वह इस चुनावों में डॉ.कल्ला को हराकर ही दम लेगें। किराडू के इस चैलेंज के बाद माना जा रहा है कि वे बीकानेर पश्चिम सीट से बागी बनकर मैदान में उतरेगें। चुनावी विश्लेषकों की मानें तो किराडू का मैदान में उतरना डॉ.कल्ला के लिये भारी पड़ सकता है,क्योंकि किराडू की शहर के युवाओं पर गहरी पकड़ है। इतना ही नहीं किराडू इस सीट पर पुष्करणा समाज के वोटों में भारी सेंधमारी कर सकते है।
तीसरी ताकत का नहीं दिख रहा असर
बीकानेर पश्चिम सीट के चुनावी जंग अब तक भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला ही होता रहा है,इस सीट पर पिछले तीन चुनावों में तीसरी ताकत का कोई खास असर देखने को नहीं मिला है। हालांकि पिछले चुनावों में कांग्रेस के बागी बने गोपाल गहलोत मैदान में उतरे जरूर थे,लेकिन उनको मैदान में उतारना कांग्रेसी की सोची समझी चुनावी चाल थी। माना जा रहा है कि डॉ.बीडी कल्ला ने गोपाल गहलोत को अपनी ढाल बनाकर मैदान में उतारा था,जिससे माली समाज के वोट बैंक पर सैंधमारी की जा सके और यह चुनावी चाल काफी हद तक कामयाब भी रही थी।

