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खुलासों के बाद भी खामोशी शिव प्लाज़ा शिव मार्केट पर कार्रवाई कब, क्या हादसे का इंतजार

पत्रकार इकबाल खान बीकानेर शहर में अवैध व्यावसायिक भवनों को लेकर किए गए गंभीर खुलासों और तथ्यात्मक रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। अधिवक्ता मोहम्मद रफीक पठान ने बताया कि शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट जैसे मामलों में नगर निगम, फायर विभाग, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और बिजली-पानी विभाग स्वयं रिकॉर्ड के अभाव और अनियमितताओं को स्वीकार कर चुके हैं, इसके बावजूद कार्रवाई न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि यह मामला अब केवल एक रिपोर्ट या समाचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही की सीधी परीक्षा बन चुका है। जब यह स्पष्ट हो चुका है कि इन मार्केटों के पास न फायर एनओसी है, न वैध निर्माण स्वीकृति, न पर्यावरणीय अनुमति और न ही पारदर्शी विभागीय रिकॉर्ड, तो इनका संचालन किस आधार पर जारी है  यह आमजन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अधिवक्ता रफीक पठान के अनुसार सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि खुलासों के बाद भी संबंधित विभागों की ओर से न कोई निरीक्षण अभियान शुरू किया गया, न कोई सीलिंग कार्रवाई हुई और न ही कोई सार्वजनिक चेतावनी जारी की गई। इससे यह संदेश जा रहा है कि प्रशासन या तो मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा या फिर किसी कारणवश कार्रवाई से बच रहा है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि शहर में हाल ही में हुई घटनाएं  गैस रिसाव से विस्फोट, मॉल और दुकानों में आगजनी  पहले ही यह साबित कर चुकी हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी घातक हो सकती है। इसके बावजूद यदि प्रशासन निष्क्रिय बना रहता है, तो स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है। बीकानेर की जनता अब यह जानना चाहती है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा? क्या कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहेगी? और यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने कहा कि शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट जैसे मामले पूरे शहर में फैली उस व्यवस्था का हिस्सा हैं, जहां नियमों की अनदेखी कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अंत में उन्होंने मांग की कि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाए। अवैध और असुरक्षित परिसरों की पहचान कर उन्हें तत्काल बंद किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसके बावजूद भी प्रशासन मौन रहता है, तो जनहित में उच्च न्यायालय की शरण लेने सहित कानूनी विकल्प अपनाए जाएंगे। बीकानेर की जनता अब इंतजार नहीं, कार्रवाई चाहती है। क्योंकि यह मुद्दा केवल एक मार्केट का नहीं, बल्कि हर नागरिक की सुरक्षा से जुड़ा है। अब सवाल नहीं, जवाब चाहिए  मौन नहीं, कार्रवाई चाहिए।

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