सत्तर साल की उम्र में बच्चे भूलने लगते है बुजुर्ग मां बाप को वंही अब सरकार भी भूल चुकी है।
70 साल की उम्र में बच्चे भूलने लगते है बुजुर्ग मां बाप को वंही अब सरकार भी भूल चुकी है। यहां तक कि रेलवे अस्पताल में पेंशनर को दवाई लेने की परेशानियां।
आईरा वार्ता इक़बाल कायमखानी, बीकानेर मुस्लिम महासभा के राष्ट्रीय सचिव एन डी क़ादरी ने बताया कि क्या भारत में सीनियर सिटीजन होना गुनाह है? भारत में 70 वर्ष की आयु के बाद वरिष्ठ नागरिक चिकित्सा बीमा के लिए पात्र नहीं हैं, उन्हें ई एमआई पर ऋण नहीं मिलता है। ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जाता है। उन्हें कोई नौकरी नहीं दी जाती है। इसलिए वे दूसरों पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने अपनी युवावस्था में सभी करों का भुगतान किया था। अब सीनियर सिटीजन बनने के बाद भी उन्हें सारे टैक्स चुकाने पड़ते हैं। भारत में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई योजना नहीं है। रेलवे यात्रा पर मिलने वाली 40% की छूट भी बंद कर दी गई है। यह एक भयानक और पीड़ादायक बात है। अगर वरिष्ठ नागरिक नाराज हो जाते हैं, तो इसका असर चुनावों पर पड़ेगा और सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। वरिष्ठ नागरिकों में सरकार बदलने की ताकत है, सरकार उन्हें कमजोर समझकर नजरअंदाज न करे , सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। सरकार गैर- अन्य योजनाओं पर बहुत पैसा खर्च करती है, लेकिन यह कभी नहीं महसूस करती है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी एक योजना आवश्यक है। इसके विपरीत बैंक की ब्याज दरें घटाकर वरिष्ठ नागरिकों की आय कम कर दी है। भारतीय वरिष्ठ नागरिक होना एक अपराध लगता है.
यहां इधर बीकानेर मंडल के रेलवे का सबसे बड़ा अस्पताल लालगढ़ (बीकानेर) में बना हुआ है यहां केन्द्र सरकार द्वारा उम्मीद कार्ड के नाम से बने हुए हैं। जिसका रजिस्ट्रेशन भारतीय स्तर पर लेकिन किसी वृद्ध की दवा लेने परिवार का सदस्य जाने पर वहां काउंटर बैठे कर्मचारी कम्प्यूटर में दर्ज करने मना कर देते हैं। कि मरीज स्वयं आए यहां तक वृद्ध मरीज के सेवानिवृत्त पति को भी पत्नी का कम्प्यूटर में दर्ज करने से मना कर देते हैं। जबकि वहां के किसी डाक्टर को कार्ड के साथ परिवार के सदस्य को मना नहीं किया जाता। ऐसे में डाक्टर से ज्यादा काउंटर बैठे अटैंड कि चल रही है।
यह हाल है केंद्रीय मंडल अस्पताल के तों मंडल के अन्य अस्पतालों का क्या होगा । वरिष्ठ नागरिक जाय तो जाय कहां। सरकार की ओर से 700 रुपये पेंशन मिलती है उसमेंं 70 साल का बूढ़ा सीनियर सिटीजन क्या करें। आजकल तो बसों में बूढ़े बुजुर्ग बस में खड़े सफर करतेे हैं एक वक्त थाााााााााााा जब कोई बूढ़े आदमी को देखते थे तो लोग सीट से उठकर उन्हें सीट देदेते थे, अब वक्त के साथ साथ सीनियर सिटीजन ओं की इज्जत घटती जा रही है बीकानेर से एंडी कादरी मुस्लिम महासभा।


