देशनोक पालिका चेयरमैन चुनाव में कांग्रेस ने गैर-पार्षद सरीता को बनाया प्रत्याशी, पूर्व पालिकाध्यक्ष को निर्दलीय मैदान में, नामांकन वापसी तक सस्पेंस कायम
देशनोक पालिका चेयरमैन चुनाव में कांग्रेस ने गैर-पार्षद सरीता को बनाया प्रत्याशी, पूर्व पालिकाध्यक्ष को निर्दलीय मैदान में, नामांकन वापसी तक सस्पेंस कायम
आईरा समाचार बीकानेर । देशनोक नगरपालिका अध्यक्ष पद का मुकाबला अब महज एक राजनीतिक जंग न रहकर कानूनी दांव-पेंच, रणनीति और जबरदस्त सस्पेंस की पटकथा बन चुका है। नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की पट्टा जांच का खौफ साफ तौर पर नजर आया। कानूनी शिकंजे से बचने के लिए कांग्रेस ने अंतिम समय में मास्टरस्ट्रोक खेलते हुए गैर-पार्षद सरिता मूंधड़ा पर दांव खेला है, वहीं घोषित प्रत्याशी ओमप्रकाश मूंधड़ा ने निर्दलीय पर्चा दाखिल कर प्रदेश की राजनीति में थ्रिलर बढ़ा दिया है। अंतिम दिन कुल छह नामांकन पत्र दाखिल किए गए। इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस की बैकअप रणनीति और कानूनी अयोग्यता का डर केंद्र में रहा। कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए कांग्रेस ने गैर-पार्षद सरिता मूंधड़ा को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। वहीं, भाजपा की ओर से चंदा देवी को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। बता दें कि सरिता मूंधड़ा ने भाजपा प्रत्याशी चंदा देवी के सामने वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ा था, जिसमें सरिता करीब नौ वोटों से हार गई थी। पूर्व पालिकाध्यक्ष ने भरे दो पर्चे देशनोक नगर पालिका पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश मूंधड़ा ने दो पर्चे भरे हैं। एक कांग्रेस से और दूसरा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में। पट्टा प्रकरण में मूंधड़ा को हाईकोर्ट से भले ही उन्हें अंतरिम राहत मिल गई हो, लेकिन गिरफ्तारी और अयोग्यता की तलवार अब भी लटकी हुई है।
आंकड़ों में भारी कांग्रेस, पर जांच का साया
25 वार्डों वाली देशनोक नगरपालिका में बहुमत का जादूई आंकड़ा 13 है। आंकड़ों के लिहाज से कांग्रेस का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन राह आसान नहीं है। वहीं, भाजपा के पास केवल आठ पार्षद हैं, जो बहुमत के आंकड़े से काफी दूर हैं।
कांग्रेस के लिए गले की फांस बनी एसीबी जांच
पिछले कांग्रेस बोर्ड के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और पट्टा प्रकरण की एसीबी जांच ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है। सत्ता पक्ष के लिए यह जांच गले की फांस बनी हुई है।
नामांकन वापसी तक टिका रोमांच देशनोक का यह चुनाव अब कानूनी लड़ाई और राजनीतिक शह-मात के खेल में बदल चुका है। ओमप्रकाश मूंधड़ा पर्चा वापस लेते हैं या मैदान में डटे रहते हैं, इसका फैसला नामांकन वापसी के दिन ही होगा। बहरहाल, देशनोक की सियासत में आने वाले दिन लीगल एक्शन और हाई-वोल्टेज ड्रामे से भरे रहने वाले हैं।

