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बीकानेर जिले के मुस्लिम समाज में कांग्रेस पार्टी के प्रति बे इन्तिहा नाराज़गी

आईरा समाचार बीकानेर बीकानेर जिले के मुस्लिम समाज में कांग्रेस पार्टी के प्रति बे इन्तिहा नाराज़गी 
यू आई टी चैयरमैन अथवा शहर या देहात कांग्रेस अध्यक्ष पद दिए जाने की मांग ।मुख्य मंत्री श्री अशोक गहलोत के तेरा पंथ भवन में आयोजित कार्यकर्ताओ के सम्मेलन का भी किया गया था बहिष्कार ।सन 2018 के विधानसभा चुनाव में बीकानेर जिले की सातों सीटों पर मुस्लिम समाज ने शत प्रतिशत वोट कांग्रेस पार्टी को दिया था ! यह विशेष रूप से ध्यान रखा गया था कि मुस्लिम वोट कहीं अन्य जगह ना चले जाए कि जिससे कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को नुकसान नहीं हो जाए ।बीकानेर पश्चिम क्षेत्र में पीर अमीन शाह ने पोस्टर्स लगाए थे, उनका मानस चुनाव लड़ने का था ? बी डी कल्ला जी से उनकी मुलाकात करवा दी गई थी, और उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा ? गुलाम मुस्तफा उर्फ बाबू भाई ने भी सेक्रिफाइस किया ? शबनम बानो ने निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन मुसलमान कल्ला जी के साथ रहे और चुनाव में जीत हासिल करवाई ।
बीकानेर पूर्व में बसपा से पीर रफीक शाह ने चुनाव लड़ा, लेकिन मुसलमानों ने कांग्रेस के कन्हैया लाल झवर को लगभग 99 प्रतिशत वोट दिए । खाजूवाला में मुस्लिम समाज के डॉक्टर विश्वनाथ मेघवाल से बेहद लगाव था , दो बार उनको विधायक भी बनाया था लेकिन इस दफा वोट शत प्रतिशत गोविन्द राम चौहान को दिए और रिकॉर्ड वोट से जीत दिलाई यही हालात कोलायत क्षेत्र में भंवर सिंह भाटी के रहे, मुस्लिम समाज ने देवी सिंह भाटी की जगह शत प्रतिशत वोट इनको दिए ! यही हालात हर क्षेत्र के रहे ? लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी मदन गोपाल मेघवाल को जी भर के मुसलमानों ने वोट दिए ।राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी, बीकानेर जिले से जितने वाले तीनों विधायक मंत्री बन गए ? लेकिन अफ़सोस किसी भी मंत्री ने मुस्लिम समाज के हकों की पैरवी नहीं की ? गोविन्द राम चौहान और भंवर सिंह भाटी ने पूरे चार साल किसी मुसलमान को राज्य स्तरीय पद देने की सिफारिश नहीं की ? खाजूवाला में साठ हजार के लगभग मुस्लिम वोटर हैं लेकिन सब लोग इनको सिर्फ देखते ही रहे ।अलबत्ता बी डी कल्ला ने जब भी जरूरत पड़ी, उन्होंने अपने स्तर पर मुसलमानों को हक़ मिलने की बराबर वकालत की, लेकिन सफ़लता नहीं मिली ? बीकानेर यू आई टी चैयरमैन पद खाली पड़ा है । राजस्थान मदरसा बोर्ड का अध्यक्ष झुंझुनू के कलाल समाज के नेता को बना दिया गया ? भाजपा ने भी पिछली दफा रहमत खान कलाल की पोती मेहरू निशा को मदरसा बोर्ड का अध्यक्ष बनाया था बीकानेर शहर या देहात अध्यक्ष भी किसी मुसलमान को बनाया जा सकता था , शहर में मकसूद अहमद, गुलाम मुस्तफा उर्फ बाबू भाई, हारून राठौड़, सबीर अहमद, आज़म खान क्यामखानी , अब्दुल मजीद खोखर, रमजान कछावा आदि और देहात में सत्तू ख़ान, सलीम कलर, अकरम समेजा, सलीम सोढ़ा, अयुब सोढ़ा, जावेद पडिहार, जावेद क्यामखानी, शरीफ़ समेजा , सलीम भाटी, सोफिन समेजा अथवा बहुत सारे रिटायर्ड कर्मचारी भी हैं जो कांग्रेस की राजनीति कर रहे हैं, ये बहुत सारे दिग्गज मुस्लिम नेता हैं जो कांग्रेस अध्यक्ष बनने की काबिलियत रखते हैं ।कांग्रेस पार्टी ने पूर्व में शहर में यशपाल गहलोत और देहात में महेन्द्र गहलोत को अध्यक्ष बनाया था ? इनके साथ इनकी जाति के कितने लोग कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं , सारा शहर जानता है।
महेन्द्र गहलोत को केश कला बोर्ड और डूंगर राम गैदर को माटी कला बोर्ड का अध्यक्ष बनाया, बीकानेर जिले के किसी मुस्लिम नेता को भी एडजस्ट किया जा सकता था ?
जिले में मुस्लिम समाज में बेहद रोष है ? अशोक गहलोत, रंधावा और डोटासरा द्वारा आयोजित सम्मेलन का मुस्लिम समाज ने बहिष्कार किया, यहां तक कि पी सी सी सदस्य मकसूद अहमद, दोनों ब्लॉक अध्यक्ष को भी जाने से रोक दिया गया था , अलबत्ता पी सी सी सदस्य जियाऊर रहमान और डॉक्टर तनवीर अहमद को सम्मेलन में अवश्य देखा गया था, लेकिन बाकि अधिकतर नेता नहीं गए और लगभग सभी मुस्लिम समाज के नेताओं ने दूरी बनाए रखी । अभी लगातार मुस्लिम मौहल्लों में मुस्लिम समाज की मीटिंग हो रही है ! घड़सीसर, रिडमल सर, बड़ा बाजार, सर्वोदय बस्ती में मीटिंग्स हो चुकी है जिसमें सैंकड़ो की तादाद में युवा वर्ग इक्कठा हो रहा है, बहुत गुस्सा देखा जा रहा है । यदि कांग्रेस पार्टी को आने वाले चुनाव में मुस्लिम समाज के वोटों की जरूरत है तो उनको बीकानेर के मुस्लिम समाज को satisfied करना चाहिए ? हालांकि कल्ला जी ने तो कह भी दिया था कि वे तो शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष के लिए अनिल कल्ला का नाम विथड्रा करने को तैयार हैं।जिले के मुस्लिम समाज को कल्ला जी से कोई शिकायत और नाराज़गी नहीं है। चुनाव में मात्र छह महीने बाकी है, गेंद अब राजस्थान की कांग्रेस सरकार के पाले में है, उनको निर्णय करना है कि मुसलमानों को राज़ी करे या ना करे।  फकत बीकानेर की आवाज़
बीकानेर ।

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