आईरा समाचार इकबाल खान बीकानेर बीकानेर के पीबीएम अस्पताल की हालत दिनों-दिन बदतर होती जा रही है। अस्पताल में फार्मासिस्ट न होकर 8वीं पास कर्मचारियों द्वारा दवाइयां बांटी जा रही हैं, जिससे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल अधीक्षक और चिकित्सा मंत्री के खिलाफ 18 अगस्त को मेडिकल कॉलेज के सामने विरोध स्वरूप पुतला दहन होगा, ताकि उनकी प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार पर सवाल उठ सकें।पीबीएम हेल्प कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि सरकार लाखों रुपये वेतन देने के बावजूद प्रशिक्षित फार्मासिस्ट पीबीएम में नहीं आते हैं। उनकी जगह अनपढ़ नौकरों को बैठा दिया गया है, जो दवाई वितरण में नाकामी और भ्रष्टाचार का कारण बन रहे हैं। अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र वर्मा पर भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे मरीजों की अनदेखी कर रहे हैं और प्रशासनिक भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं, जबकि मंत्री सुमित गोदारा के रिश्तेदार अस्पताल की दवा अपने मेडिकल दुकान पर बेचकर फायदा उठा रहे हैं।
समाजसेवी सुरेंद्र सिंह ने डॉ. वर्मा से इस्तीफा देने की मांग करते हुए कहा कि वे मरीजों का शोषण कर अस्पताल के हालात बदतर बनाने में शामिल हैं। वहीं अस्पताल के परिसर में विधायक कोटे से मिले 10 ई-रिक्शे बुजुर्ग मरीजों के लिए मुफ्त सेवा हेतु लगाए गए थे, पर वो कहीं दिखाई नहीं दे रहे, जिससे मरीजों को टैक्सी लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ई-रिक्शा पॉइंट का अभाव भी व्यवस्था में बाधा बना हुआ है।
यह पूरा मामला पीबीएम अस्पताल प्रशासन की गंभीर नाकामी, जवाबदेही की कमी और मरीजों के शोषण को उजागर करता है। जनता के बीच नाराजगी बढ़ रही है और जांच के साथ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

