करी हिफाजत वतन की जिसने अपनी अंतिम सांस तक
राष्ट्रीय कवि चौपाल की 529वीं विशेष सभा में स्वाधीनता दिवस पर देशभक्ति का जज़्बा और साहित्य का संगम
आईरा समाचार बीकानेर राष्ट्रीय कवि चौपाल की 529वीं विशेष सभा स्वाधीनता दिवस के अवसर पर बड़ी धूमधाम से आयोजित की गई। इस खास कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी श्री प्रेमशंकर कट्टा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा बीकानेर जिलाध्यक्ष श्रीमती सुमन छाजेड़ ने शिरकत की, जबकि प्रांत अध्यक्ष अखिल भारतीय साहित्य परिषद, राजस्थान, डॉ. अखिलानंद पाठक और गौसेवी वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री एन डी कादरी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त कई कवि, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक भी मंचासीन हुए।कार्यक्रम की शुरुआत ईश्वर वंदना से हुई, जिसे रामेश्वर साधक ने प्रस्तुत किया, जिन्होंने स्वतंत्रता के सही अर्थ पर रोशनी डाली। उनका कहना था कि स्वतंत्रता का मतलब संस्कृति और मानवता से खिलवाड़ नहीं बल्कि उनके बीच सामंजस्य और सम्मान बनाये रखना है। उन्होंने स्वतंत्रता को केवल स्वच्छंदता नहीं माना बल्कि यह अनुशासन और मर्यादा का परिचायक भी बताया।
अध्यक्ष प्रेमशंकर सोनी ने भाषण में कहा, भारत केवल सोने की चिड़िया ही नहीं, विश्व गुरु भी है।“ उन्होंने कहा कि इतिहास में भारत कई बार गुलाम हुआ क्योंकि संगठन के अभाव में जनता एकजुट नहीं हो पाई, लेकिन अब संगठित होकर हम विश्व गुरु के मुकाम को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने सभी से एकजुटता और देशभक्ति का आग्रह किया।
मुख्य अतिथि श्रीमती सुमन छाजेड़ ने अपने सशक्त संदेश में कहा, “उम्र चाहे पचपन हो या पचहत्तर, दिल हमेशा युवा और उर्जावान रहना चाहिए। देश के प्रति भावनाओं को हमेशा जिंदा रखना जरूरी है।” उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे अपने हौसले और जोश को कभी कमजोर न होने दें।
डॉ. अखिलानंद पाठक ने यह स्पष्ट किया कि कविताएं प्रासंगिक और कालजयी होती हैं, लेकिन उन कविताओं का सारांश तभी सफल होता है जब पुरुषार्थ यानी कर्मशीलता और परिश्रम भी काल के अनुसार निरंतर चलता रहे। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद तकनीकी नवाचार और आदर्श संस्कारों दोनों में भारत ने कई उपलब्धि हासिल की है, जो हमारे आने वाले समय का मजबूत आधार हैं।
गौसेवी और वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री एन डी कादरी ने गाय के संरक्षण पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि गाय का पौषण सिर्फ पशु तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे श्रेष्ठतम रूप से पालना चाहिए। इसके संदर्भ में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना एक अत्युत्तम कदम होगा, जो देश की कृषि और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करेगा।
कार्यक्रम में डॉ. कृष्ण लाल विश्नोई ने अपनी देशभक्ति कविताओं से कार्यक्रम को जीवंत कर दिया। उन्होंने शांति और आज़ादी के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को याद करते हुए कहा, “जान अपनी देश पर वारो, दिल्ली चलो रौ दियो नारो।” वहीं सरदार अली परिहार ने जीवन जीने की सकारात्मकता और संघर्ष की भावना का संदेश दिया, जबकि बाबू बमचकरी ने मन में बहती गंगा की तरह देशप्रेम की भावना व्यक्त की।शिव प्रकाश दाधिच ने उन वीरों को नमन किया जिन्होंने अंतिम सांस तक वतन की हिफाजत की, और कहा कि उनकी बलिवेदी पर श्रद्धा सुमन चढ़ाना हमारा परम कर्तव्य है। सभा में रामेश्वर साधक, सरोज भाटी, राजकुमार ग्रोवर, शमीम अहमद, कृष्णा वर्मा, पवन चढ़्ढा जैसे अन्य कवियों ने भी अपने देशभक्ति गीत और कविताओं से श्रोताओं के दिल जीत लिए।कार्यक्रम में कुल 14 साहित्यकारों ने भाग लिया, साथ ही बी जे पी जिला मंत्री श्याम सिंह सांगवान, मधुरिमा सिंह, हरिकांत शर्मा, पुखराज सोनी, लोकेश लाडणवाल, महबूब अली, निसार अहमद एंडी कादरी समेत कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का चुटीला और मनोरंजक अंदाज बाबू बमचकरी ने पेश किया।अंत में राष्ट्रीय गान के साथ इस भव्य कवि सम्मेलन का समापन हुआ, जिसमें सभी ने देशभक्ति और सेवा के संकल्प को पुनः नए जोश के साथ दोहराया।


