क्या बीकानेर नगर निगम चुनाव में दोनों राजनीतिक दलों के कई पार्षदों ने की क्रॉस वोटिंग? कादरी
बीकानेर। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता एनडी कादरी ने सोमवार को कहा कि बीकानेर नगर निगम के महापौर और उपमहापौर चुनाव के परिणामों के बाद शहर में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के पार्षदों की क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि मतदान गुप्त होने के कारण किस पार्षद ने किस प्रत्याशी को वोट दिया, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।कादरी ने कहा कि 21 सितंबर को हुए महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला को 50 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले। कांग्रेस के पास 42 पार्षद और भाजपा के पास 27 पार्षद थे। चुनाव परिणाम से यह स्पष्ट है कि दोनों प्रत्याशियों को उनके दलों के पार्षदों की संख्या से अलग वोट मिले, हालांकि इन अतिरिक्त या कम वोटों को किसी विशेष पार्षद से जोड़ना संभव नहीं है। कादरी का कहना है कि चुनाव से पहले कांग्रेस खेमे में अपने प्रत्याशी के पक्ष में अधिक समर्थन मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था, जबकि भाजपा खेमे में भी निर्दलीय पार्षदों और संभावित समर्थन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक गणित लगाया जा रहा था। परिणाम आने के बाद इन सभी दावों और कयासों पर सवाल खड़े हुए हैं।उन्होंने कहा कि महापौर चुनाव में कांग्रेस की जीत के अगले दिन उपमहापौर चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भाजपा के पंकज गहलोत को 40 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की नसीम बानो को 38 वोट मिले। एक वोट नोटा में गया और एक मत निरस्त हुआ। इस परिणाम के बाद कांग्रेस के पास 42 पार्षद होने के बावजूद उसके प्रत्याशी को 38 वोट मिलना और भाजपा के 27 पार्षदों के बावजूद उसके प्रत्याशी को 40 वोट मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।कादरी ने कहा कि उपमहापौर चुनाव से पहले कांग्रेस खेमे में प्रत्याशी चयन को लेकर कई नाम सामने आए और अंततः नसीम बानो को प्रत्याशी बनाया गया। दूसरी ओर भाजपा ने महापौर चुनाव में हार के बाद उपमहापौर पद के लिए पूरी तैयारी के साथ रणनीति बनाई। उनके अनुसार चुनाव परिणाम ने दोनों दलों के अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।उन्होंने कहा कि शहर में कुछ लोग नोटा और निरस्त मत को लेकर भी तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं, लेकिन इन मतों को किसी विशेष पार्षद या समुदाय से जोड़ना प्रमाण के अभाव में उचित नहीं होगा। इसी तरह कांग्रेस या भाजपा के किन पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की, यह भी गुप्त मतदान के कारण आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
कादरी ने कहा कि चुनाव परिणामों को लेकर राजनीतिक दलों को अपने स्तर पर समीक्षा करनी चाहिए और यह पता लगाने का प्रयास करना चाहिए कि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में अपेक्षित मतदान क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में लगाए जा रहे आरोपों की भी तथ्यात्मक जांच जरूरी है, ताकि बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या समुदाय पर आरोप न लगे।
उन्होंने कहा कि बीकानेर नगर निगम के इन दोनों चुनावों ने यह जरूर स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक दलों के घोषित संख्या बल और मतदान के वास्तविक परिणामों के बीच अंतर रहा है। अब सवाल यह है कि यह अंतर किन राजनीतिक समीकरणों, व्यक्तिगत पसंद या क्रॉस वोटिंग के कारण आया। इसका वास्तविक जवाब केवल संबंधित पार्षदों के सामने आने या किसी अधिकृत जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
एनडी कादरी ने कहा कि शहर के लोगों को पूरे मामले को समझने की जरूरत है और राजनीतिक दलों को भी इस घटनाक्रम की गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए।

