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राजस्थान में जाति गत समीकरणों में सबसे अधिक वोट हैं जाट समाज के क्या जाट समाज के किसी नेता को राजस्थान का मुख्य मंत्री बनाया जायेगा। एक दूसरे का विरोध करने में जाट समाज के नेताओं का कोई शानी नहीं है।

राजस्थान में जाति गत समीकरणों में सबसे अधिक वोट हैं जाट समाज के क्या जाट समाज के किसी नेता को राजस्थान का मुख्य मंत्री बनाया जायेगा। एक दूसरे का विरोध करने में जाट समाज के नेताओं का कोई शानी नहीं है।
आईरा समाचार बीकानेर,राजस्थान में आज तक 23 दफा मुख्य मंत्री की नियुक्तियां हुई हैं।अब दिनाँक 15 दिसम्बर को 24 वें मुख्य मंत्री श्री भजन लाल शर्मा ने शपथ ली है !देश की आज़ादी के बाद आज तक हीरा लाल शास्त्री, सी एस वेंकटाचारी, जय नारायण ब्यास, टीका राम पालीवाल, मोहन लाल सुखाडिया, बरकतुल्ला खान, हरि देव जोशी, भैरो सिंह शेखावत, जगन्नाथ पहाड़िया, शिव चरण माथुर,हीरा लाल देवपुरा,अशोक गहलोत, वसुन्धरा राजे सिंधिया और अब भजन लाल शर्मा प्रदेश के मुख्य मंत्री बनाए गए हैं !
इनमें आज तक ब्राह्मण समाज के 5, मुस्लिम के 1,जैन समाज , 1,माहेश्वरी समाज के 2,दलित समाज के 1, माली समाज के 1 (ओ बी सी) तथा दो राजपूत समाज ( भैरो सिंह शेखावत और वसुन्धरा राजे सिंधिया) के मुख्य मंत्री बनाए गए हैं ?
लेकिन आज़ादी के बाद एक भी जाट समाज का कोई नेता मुख्य मंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाया है ? अलबत्ता नेता प्रतिपक्ष परस राम मदेरणा और रामेश्वर डूडी को अवश्य बनाया जा सका है।
यह भी हकीकत है कि प्रदेश में जनसंख्या के हिसाब से अनुमान के तौर पर सबसे अधिक जाट समाज के 19.5 प्रतिशत मतदाता पूरे प्रदेश में हैं और यहीं नहीं बल्कि विधानसभा में सबसे अधिक विधायक भी जाट समाज के ही जीत कर विधानसभा में आते हैं ? अभी नई विधानसभा में जाट विधायकों की तादाद 32 बताई जा रही है।
यह भी एक कटु सत्य है कि मौजूदा समय में जाट समाज में एकता का अभाव है, एक दूसरे की खिलाफत करने और चुनाव में हराने का काम भी सबसे अधिक जाट समाज के नेता ही करते हैं और उसी भीड़ में जनता भी ग्रुपों में बंट कर जाट समाज के नेता को हराने में मशगूल हो जाते हैं ? नतीजा यह होता है कि वोटों की बहुतायत होने के बावजूद अन्य जाति समाज के नेता जाट बाहुल्य क्षेत्र में भी चुनाव में जीत हासिल कर लेते हैं।
दिनांक 25 नवम्बर, 2023 को हुए चुनाव में बहुत सारी जगह ऐसे हालात बने हैं कि जहां जाट नेता आपस में लड़ते रहे और फ़ायदा कोई और उठा ले गया।
सूरतगढ़ में भाजपा ने राम प्रताप कासनिया को टिकट दी, कांग्रेस ने डूंगर राम गैदर को टिकट दी ? निर्दलीय रुप में राजेन्द्र भादू, बसपा से महेन्द्र भादू और जे जे पी से पृथ्वी राज मील चुनाव मैदान में आ गए, नतीजा यह हुआ कि भाजपा के राम प्रताप कासनिया चुनाव हार गए।
डूंगरगढ़ से सी पी एम पार्टी से गिरधारी लाल मईया और कांग्रेस से मंगला राम गोदारा चुनाव मैदान में थे ? भाजपा से तारा चन्द सारस्वत ने इन दोनों जाट नेताओं को जाट बाहुल्य क्षेत्र में हरा दिया।
डेगाना के चुनाव में अजय सिंह क्लिक और रिछपाल मिर्धा की जुबानी जंग अभी भी चल रही है।
ज्योति मिर्धा और हरैंद्र मिर्धा के चुनाव में बड़ी मुश्किल से हरेन्द्र मिर्धा द्वारा सीट निकाली जा सकी है।
दिव्या मदेरणा और बद्री राम जाखड़ का विवाद प्रदेश में किससे छिपा रहा है। बाड़मेर जिले में हरीश चौधरी ने बेहद संघर्ष के बाद तीन अंकों से जीत हासिल की है।
लूणकरणसर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी ने डॉक्टर राजेन्द्र मूंड को टिकट दी, भाजपा से सुमित गोदारा सामने आए ओर पूर्व मंत्री वीरेन्द्र बेनीवाल निर्दलीय रुप में आ गए और डॉक्टर राजेन्द्र मूंड चुनाव हार गए।
हो सकता है कि अन्य जाति समाज के नेताओं में भी कोई ना कोई नाइत्तेफाकियां रही हो लेकिन सार्वजनिक रूप से इतना आपसी विरोध देखने में कम ही आ रहा है।
आर एल पी के नेता हनुमान बेनिवाल ने जाट समाज के नाम को बहुत ऊंचा बढ़ाया लेकिन समाज ने क्या दिया ?
पिछले टेन्योर में उनके तीन विधायक विधानसभा में थे और वह ख़ुद संसद सदस्य थे लेकिन इस चुनाव में हनुमान बेनिवाल अकेले की सीट ही निकाल पाए हैं।क्या इसके लिए जाट समाज की जनता जिम्मेदार नहीं है।
भाजपा ने सतीश पूनिया को पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष बना रखा था लेकिन वे आमेर से चुनाव हार गए। इसका नुक़सान यकीनन जाट समाज को ही होगा।
सन 2018 के चुनाव में भी नोखा से रामेश्वर डूडी, डूंगरगढ़ से मंगला राम गोदारा और लूणकरणसर में वीरेन्द्र बेनीवाल भी जाटों की आपसी गुटबाज़ी की वजह से तीनों जाट नेता चुनाव हार गए थे।
चुनाव से पहले जयपुर में हुए एक जाट समाज की सार्वजनिक मीटिंग में अगला मुख्य मंत्री जाट समाज के बनाए जाने का जाट नेताओं ने आह्वान भी किया था, लेकिन उस आह्वान का क्या हुआ।
अब यह विचार करने का विषय है कि क्या राजस्थान में कभी जाट समाज के किसी नेता को मुख्य मंत्री बनाए जाने का सौभाग्य प्राप्त हो सकेगा।
फकत बीकानेर की आवाज़ बीकानेर !

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