पूर्व विधानसभा क्षेत्र से यशपाल गहलोत की टिकट का फैसला तो छह महीने पहले ही हो गया था ? क्या माली समाज के वोटों के ध्रुवीकरण के लिए क्षेत्र के पंजाबी, बनिया, मुस्लिम, ब्राह्मण और राजपूत समाज की अनदेखी की गई ।
आईरा समाचार बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से यशपाल गहलोत की टिकट का फैसला तो छह महीने पहले ही हो गया था।
क्या माली समाज के वोटों के ध्रुवीकरण के लिए क्षेत्र के पंजाबी, बनिया, मुस्लिम, ब्राह्मण और राजपूत समाज की अनदेखी की गई ।क्या बीकानेर जिले की सातों सीटों पर कोई प्रतिकूल असर पड़ सकेगा।राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में सन 2018 में बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रहे कन्हैया लाल झवर ने खूब जोर शोर से हिस्सा लिया था, कई बसें भरकर, और अपनी निजी गाड़ियों में क्षेत्र की जनता को अलवर लेकर गए थे, अलवर के रास्ते में एक रिजॉर्ट में हमारा मिलना भी हुआ था।उसके तत्काल बाद हाथ से हाथ जोड़ो अभियान के तहत झवर ने बीकानेर पूर्व क्षेत्र में जनता से मिलने का अभियान भी शुरू कर दिया था ।रामपुरा बस्ती, बांद्रो के बास गुजरों की बस्ती, चौतीना कुवां एरिया और अंबेडकर कॉलोनी में हाथ से हाथ जोड़ो अभियान चलाया ? लेकिन तभी अचानक कन्हैया लाल झवर को कांग्रेस के इस अभियान पर विराम लगाना पड़ा विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली कि कन्हैया लाल झवर को पार्टी अध्यक्ष द्वारा जयपुर बुलाया गया और कहा गया कि आपको बीकानेर पूर्व से कांग्रेस पार्टी की टिकट नहीं दी जायेगी।
यह भी चर्चा है कि झवर को कहा गया था कि किसी माली समाज के नेता को कांग्रेस की टिकट दी जायेगी ?
और दिनांक 31 अक्टूबर को बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट माली समाज के यशपाल गहलोत को देने की घोषणा कर दी गई ।
बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र का अस्तित्व सन 2008 में हुआ था।सन 2008 में पहली मर्तबा डॉक्टर तनवीर मालावत को टिकट दी गई थी, लेकिन हालात ऐसे बने कि जैसे कोई चुमाव था ही नहीं।प्राप्त जानकारी के अनुसार कुल 1,03,000 के करीब वोट कास्ट हुए, जिसमें कांग्रेस प्रत्यासी को मात्र 23,000 वोट ही प्राप्त हुए, कांग्रेस की शायद जमानत तो बच गई, लेकिन बेहद शर्मनाक करारी हार हुई। सन 2013 में भी कमोवेश ऐसे ही हालात बने, लगभग 31,000 वोट की फिर हार हुई, लेकिन सन 2018 में यह हार लगभग 6,000 के आस पास सिमट कर रह गई ? जानकर लोगों का मानना था कि झवर इस मर्तबा यह सीट निकाल सकते थे।
बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से पंजाबी समाज से अरविन्द मिढ्ढा, बनिया समाज से कौशल दुगड़, राजपूत समाज से विश्वजीत सिंह हरासर और गजेन्द्र सिंह सांखला,ब्राह्मण समाज से बाबू जय शंकर तथा शशि कांत शर्मा और मुस्लिम समाज से मुख्य रूप से गुलाम मुस्तफा उर्फ बाबू भाई टिकट की मांग कर रहे थे ? क्षेत्र में मुस्लिम , पंजाबी समाज की आबादी, राजपूत समाज और बनिया समाज तथा ब्राह्मण समाज के वोटर्स की बहुतायत है ?
माली समाज के वोट बीकानेर पश्चिम में अधिक हैं लेकिन बीकानेर जिले में माली समाज के कांग्रेस पार्टी की तरफ़ वोटों के ध्रुवीकरण किए जाने के लिए यह टिकट माली समाज के खाते में डाली गई है ।
राजनीति के जानकार मानते हैं कि माली समाज के वोट परंपरागत रूप से बहुतायत में भाजपा को मिलते हैं लेकिन यशपाल को टिकट दे कर राज्य में माली समाज के लिए एक संदेश दिया गया है ।
माना जा रहा है कि यशपाल गहलोत को टिकट दिलाने में बी डी कल्ला का भी अहम रोल रहा है ताकि बीकानेर पश्चिम क्षेत्र के माली समाज का बहुतायत का वोट बी डी कल्ला को मिल सके।
बीकानेर शहर के मुस्लिम समाज में भारी असंतोष बना हुआ है ? पूरे पांच साल सत्ता की राजनीति में कोई फ़ायदा नहीं मिला, लेकिन यह समझा जा रहा है कि मुस्लिम समाज के पास कांग्रेस को वोट देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, इसलिए उनके नाराज़गी और असंतोष का कोई अधिक नुक़सान नहीं होने वाला ।चर्चा है कि कई मुस्लिम नेताओं ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है ? गुलाम मुस्तफा, मजीद खोखर और अनवर अजमेरी का नाम इस्तिफा देने वालों की चर्चा में है । कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मजीद खोखर ने बीकानेर पश्चिम क्षेत्र से बी डी कल्ला के सामने चुनाव लडने की घोषणा भी कर दी है। अन्य समाज के नेताओं के राजनैतिक निर्णय आने बाकि हैं ? लेकिन लगता है कि इस निर्णय का खमियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है ।चर्चा है कि इस टिकट बंटवारे में मुख्य मंत्री और बी डी कल्ला की ही मुख्य भूमिका रही है ? देखते हैं कि बी डी कल्ला को इसका कितना फ़ायदा चुनाव में मिल पायेगा । फकत बीकानेर की आवाज़ बीकानेर !

