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बीकानेर  संगीत का सागर हुआ,शांत संगीत प्रेमियों में छाई शोक ही लहर

आईरा अख्तर बीकानेर  बीकानेर। ‘सपने में सखी देखो नंद गोपाल भजन के लिये पहचाने जाने के लिये बीकानेर के मशहूर गायक रफीक सागर का आज शनिवार को हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी खास पहचान बनाने वाले रफीक सागर न केवल बीकानेर बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध थे। उनकी आवाज का जादू भजनों और सूफी संगीत में साफ झलकता था। रफीक सागर के पुत्र राजा हसन भी संगीत की दुनिया का एक जाना-माना नाम हैं और उन्होंने अपने पिता की संगीत विरासत को बखूबी आगे बढ़ाया। पिता और पुत्र की इस जोड़ी ने संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई थी।रफीक सागर ने अपने जीवन में सूफी और भक्ति संगीत के जरिए लाखों दिलों को छुआ। उनके गाए गीतों और भजनों ने न केवल धार्मिक संगठनों बल्कि आम लोगों के बीच भी अपनी गहरी छाप छोड़ी। उनका निधन संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति है।उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी और उनके प्रशंसक इकठ्ठा हुए। रफीक सागर को हमेशा उनके अद्वितीय गायन और संगीत के प्रति समर्पण के लिए याद किया जाएगा। सागर को दोपहर में बड़ी कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। उनके जनाजे में संगीत से जुड़ी हस्तियां,कवि,लेखक ,साहित्यकार सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे।
 जिनमें  पूर्व महापौर हाजी  मकसूद अहमद ने शोक प्रकट किया ओर कहा हिंदुस्तान के पार्श्वगायक गजल एवं भजन गायक रफीक सागर साहब के निधन से बीकानेर की ही नहीं बल्कि हिंदुस्तान को संगीत के क्षेत्र में बहुत बड़ी क्षती हुई है,  गायक कलाकार एम .रफीक. कादरी ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सपने में सखी देखो नंद गोपाल जैसे प्रसिद्ध भजन आज भी लोग सुनते हैं उनका जाना संगीत क्षेत्र में दुखदाई है, संगीत प्रेमी  सैय्यद अख्तर ने कहा कि दिवंगत सागर साहब ने गजल एवं भजन के रूप में पूरे हिंदुस्तान में धूम मचाई  थी।आप बीकानेर में सांप्रदायिक सोहार्द की एक मिसाल थे। आप के बाबा रामदेव के भजन पूरी दुनिया मे जहां जहां हिंदुस्तान के लोग निवास कर रहे हैं वहां आज भी बडी लगन से सुनते हैं। गायक कलाकार अनवर अजमेरी ने कहा बीकानेर का सगींत क्षेत्र का सितारा इस दुनिया से विदा हुवा खुदा उन्हे जन्नत मे आला से आला मकाम अता फरमाये। शाकिर अली चोपदार ने उनके निधन पर दुख प्रकट किया और कहां इस क्षति की पूर्ति होना संगीत के क्षेत्र में मुश्किल है। उनके जनाने मे वरिष्ठ पत्रकार  नासिर जैदी, राजन जैदिया,अयुब खान संगीतकार गायक कलाकार पुखराज शर्मा, पूर्व पार्षद दीपक अरोड़ा , कुदरत अली चौहान , हाजी अब्दुल मजीद खोखर  , भूरसिंह जोशी , पूर्व पार्षद रमजान अली कच्छावा, मंजूर चंदवानी, मुन्ना सरकार, मास्टर भंवर प्यारे लाल ,कमल श्रीमाली ,उस्ताद गुलाम हुसैन ,खलील दम्मामी,  ख्वाजा हसन कादरी , अमीन उस्ताद,  चांद सुलेमानी,  आमीन सुलेमानी, पेंटर अजमल , महेंद्र कोचर, साहित्यकार इरशाद अज़ीज़ ,राहुल जोशी, मौलाना अलीमुद्दीन जामी, देवानंद चांवरिया, समीर चांवरिया, सुशील यादव, सुनील दत्त नागल, पूर्व पार्षद सुनील बांठिया, कुणाल कोचर, सुभाष यादव, रामकिशोर यादव, मेहबूब अली रंगरेज चांद अली रंगरेज , डॉ अर्पिता गुप्ता, कैलाश खरखोदिया, मेघराज नागल, किसन जोशी सहित आदि ने श्रद्धांजलि दी।

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