समाजवादी विचारधारा के जन नेता मक्खन जोशी की क्या बीकानेर शहर में स्टेच्यू नहीं लगानी चाहिए
समाजवादी विचारधारा के जन नेता मक्खन जोशी की क्या बीकानेर शहर में स्टेच्यू नहीं लगानी चाहिए
आईरा समाचार मक्खन अली और महबूब जोशी के नाम की मिठास बीकानेर शहर की गंगा जमुनी संस्कृति और तहज़ीब की अनूठी मिसाल राजनैतिक साजिश से कत्ल के मुकदमे में झूठा नाम भी शामिल कर दिया गया था।देश की आज़ादी के वक्त बीकानेर शहर में सोशलिस्ट विचारधारा के नेताओं की भरमार थी। मुरलीधर ब्यास, माणिक चन्द सुराणा, सत्य नारायण पारिक, मक्खन जोशी, एडवोकेट महबूब अली, आर के दास गुप्ता सरीखे पचासों लोग बीकानेर शहर के प्रमुख समाजवादी विचारधारा के नेता हुआ करते थे ? इनमें मुरलीधर ब्यास, माणिक चन्द सुराणा, महबूब अली और आर के दास गुप्ता विधायक बने ? मक्खन जोशी और सत्यनारायण पारिक ने विधानसभा चुनाव ज़रूर लड़ा लेकिन विधायक नहीं बन पाए।स्वर्गीय मक्खन जोशी वार्ड मेम्बर बने । उस वक्त बेहद लड़ाका किस्म के तेज़ तर्रार और शक्तिशाली नेता ही नगर पार्षद का चुनाव लड़ते थे और उनकी जनता के बीच बेहद अच्छी छवि हुआ करती थी।मुझे याद नहीं आता है कि उस समय के किसी भी वार्ड पार्षद पर कभी भ्रष्टाचार का कोई आरोप लगा हो ? नगर निगम का पैसा खाना, गन्दगी खाने जैसा समझा जाता था और कोई पार्षद नगर पालिका में ठेकेदारी भी नहीं किया करता था जर्नादन कल्ला, मक्खन जोशी, गोपाल जोशी, आर के दास गुप्ता, महेश सिंह, रफीक अहमद अब्बासी, अब्दुल रहमान लोहार, मांगी लाल छींपा आदि प्रमुख वार्ड पार्षद हुआ करते थे राजनीति के खिलाड़ी वैद्य गोविन्द नारायण शर्मा इनसे पहले पार्षद हुआ करते थे।स्वर्गीय मक्खन जोशी ने 1977 में बीकानेर शहर से जनता पार्टी से टिकट की मांग की थी लेकिन टिकट उनके करीबी दोस्त ऐडवोकेट महबूब अली को मिली और वे विधायक जीते। भैरो सिंह शेखावत ने अपनी सरकार में महबूब साहब को मिनिस्टर बनाया। भैरो सिंह शेखावत सरकार ने स्वर्गीय मक्खन जोशी बीकानेर नगर विकास न्यास का चैयरमैन बनाया !मक्खन जोशी ने पूरी ईमानदारी से नगर विकास न्यास अध्यक्ष के रुप में काम किया, उसी में मौहल्ला कसाइयां में मुसाफिर खाना की ज़मीन का आवंटन का काम था जिसकी वजह से वे बीकानेर शहर के मुस्लिम समाज के बेहद करीबी और चहेते हो गए थे, मुस्लिम समाज ने उनके नाम के आगे से जोशी हटा कर अली लगा दिया और वे मक्खन अली के नाम से मशहूर हो गए सन 1985 के विधानसभा चुनाव मक्खन जोशी ने जनता पार्टी का टिकट लेकर बी डी कल्ला के सामने चुनाव लड़ा उस वक्त मुस्लिम समाज तो इनका जबर्दस्त फैन था मुस्लिम मौहल्लों में बड़े बड़े और ऊंचे ऊंचे चक्कर के निशान लगाए गए ।उस वक्त शहर में हिन्दू मुस्लिम एकता चरम पर थी, और आलम यह था कि बीसियों मुस्लिम नेताओं के नाम के आगे जोशी लगाया जाने लगा।महबूब अली, सैय्यद अनवर अली, मजीद खोखर, अनवर दाऊदी, रफीक अहमद, असगर अली आदि के नाम के आगे जोशी लगा कर संबोधित किया जाने लगा ।लेकिन सन 1985 के चुनाव में मक्खन जोशी की कांग्रेस के नेता बी डी कल्ला के सामने करीबन 5,400 वोट से हार हो गई।मक्खन जोशी ने सन 1993 में फिर से जनता पार्टी के चक्कर के निशान पर चुनाव लड़ा, शहर का मेजोरिटी मुसलमान मक्खन जोशी के सपोर्ट में खड़ा हो गया ? लेकिन चुनाव की ही रात 10 नवम्बर के करीबन दस, साढ़े दस बजे बांद्रा बास क्षेत्र में आयुर्वेद हॉस्पिटल के पास एक जबरदस्त झगड़ा हो गया और जिसमें बिना वज़ह ही एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या हो गई।सारा शहर गमगीन हुआ लेकिन सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह रहा कि झगड़े की एफ आई आर में मक्खन जोशी और कुछ अन्य लोगों का नाम अभियुक्त के रुप में राजनैतिक शाजिश के रूप में लिखा दिया गया।उस वक्त बीकानेर जिले में एम के देवराजन डी आई जी थे जिनकी ईमानदारी के किस्से पूरे प्रदेश में गूंजते थे। देवराजन ने इस केस की तफ्तीश हनुमानगढ़ में एडिशनल एसपी पद पर कार्यरत लियाकत अली कायमखानी को दे दी जिन्होंने मक्खन जोशी और अन्य कई लोगों के निर्दोष पाए जाने पर इन लोगों के नाम मुकदमे से हटा दिए।कहते हैं कि मक्खन जोशी को कत्ल के मुकदमे में झूठा नाम जोड़ने का बहुत दुख पहुंचा ? इस घटना के बाद मक्खन जोशी ने जनता पार्टी को छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।मक्खन जोशी वास्तविक जीवन में एक जन नेता थे, ज़मीन से जुड़े रहने वाले नेता थे।दिनांक 13 जनवरी, 2001 को उनका बीकानेर शहर में आकस्मिक निधन हो गया, और बीकानेर शहर ने एक जन नेता को खो दिया।मक्खन जोशी के पुत्र कन्हैया लाल जोशी और उनके पौत्र अरविन्द जोशी की अपनी अलग पहचान है ।सवाल उठता है कि क्या ऐसे जन नेता की स्टेच्यू बीकानेर शहर में नहीं लगनी चाहिए।क्या इसमें भी किसी राजनीति का इन्तजार किया जा रहा है ?
फकत बीकानेर की आवाज़
बीकानेर !