भारतीय संस्कृति में अध्यात्म की अहम भूमिका-राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू नगाड़ा बजाकर किया राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का शुभारंभ
बीकानेर। सांस्कृतिक मंत्रालय की ओर से बीकानेर में आयोजित राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव की भव्यता देखकर अभिभूत हुई महामहिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने विधिवत रूप से नगाड़ा बजाकर महोत्सव का शुभारंभ करने के बाद अपने संदेश में कहा कि भारतीय संस्कृति में अध्यात्म की अहम भूमिका है। उन्होने महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि यह हर्ष की बात है कि कला और संगीत के सुरो से सजे इस महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों से आए कलाकारों को अपनी प्रतिभाएं एक मंच पर राष्ट्र की संतरंगी संस्कृति की छटा बिखेर रही है। उन्होने कहा कला जगत के प्रतिभावान और महान विभूतियों को देखकर मन में नई ऊर्जा का संचार होता है। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव जैसे कार्यक्रम देश की कला और संस्कृति को तो बढ़ावा देते ही हैं, साथ ही साथ राष्ट्रीय एकता की भावना को भी और मजबूत बनाते हैं। इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों से हमारे देशवासियों को हमारी सम्पन्न तथा समृद्ध संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं को जानने और समझने का अवसर मिलता है। राष्ट्रपति ने कहा कि हम जानते हैं कि परिवर्तन जीवन का नियम है। कलाओं, परम्पराओं और संस्कृति में भी समय के साथ परिवर्तन आता ही है। कला शैली, रहन-सहन का ढंग, वेश-भूषा, खान-पान सब में समय के साथ बदलाव आना स्वाभाविक है लेकिन कुछ बुनियादी मूल्य और सिद्धांत पीढ़ी दर पीढ़ी आगे चलते रहने चाहिए, तभी भारतीयता को हम जीवित रख सकते हैं। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना, शांति और अहिंसा, प्रकृति से प्रेम, सब जीवों के लिए दया, दृढ़ संकल्प से आगे बढऩा – ऐसे अनेक मूल्य हैं जो हम सब देशवासियों को एक सूत्र में बांधते हैं। आज भारत विश्व भर में अपनी नई पहचान बना चुका है जिसमें आधुनिक सोच को अपनाने के साथ-साथ परंपराओं और संस्कृति को सहेजने की क्षमता है। इस मौके पर महामहिम राज्यपाल कलराज मिश्र,केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल,राजस्थान सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ.बीडी कल्ला समेत अनेक गणमान्यजन अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।
-प्राचीन काल से गौरवशाली रही है हमारी कला शैली
राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन काल से ही हमारी कला शैली गौरवशाली रही है। सिन्धु घाटी की सभ्यता के समय से ही नृत्य, संगीत, चित्रकारी, वास्तुकला जैसी अनेक कलाएँ भारत में विकसित थीं। भारतीय संस्कृति में अध्यात्म की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। सृष्टि की प्रत्येक रचना कला का अद्भुत उदाहरण है। नदी की लहर का मधुर संगीत हो या मयूर का मनमोहक नृत्य, कोयल का गीत हो, मां की लोरी या नन्हे से बच्चे की बाल-लीला हो, हमारे चारों ओर कला की सुगंध फैली हुई है। -देश में बीकानेर की अलग पहचान
महोत्सव के शुभारंभ समारोह में महामहिम राष्ट्रपति ने बीकानेर की मिठाई नमकीन और कला संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि यह महोत्सव देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित किया जा चुका है और पहली बार इसका आयोजन राजस्थान बीकानेर में हो रहा है। हम में से बहुत से लोग बीकानेर को बीकानेरी खाद्य पदार्थों के कारण जानते होंगे लेकिन इतिहास में बीकानेर के महल और किले महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उसके अलावा बीकानेर अंतरर्राष्ट्रीय कैमिल फेस्टिल और तीज त्योहारों के लिये अपनी देश में अलग पहचान रखता है। आज के दौर में विज्ञान और कला का मेल जरूरी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि प्रौद्योगिकी का परम्पराओं से और विज्ञान का कला से मेल होना जरूरी है। आज का युग प्रौद्योगिकी का युग है। हर क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की सहायता से नए-नए प्रयोग किये जा रहे हैं। कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी टेक्नोलॉजी को अपनाया जा रहा है। इन्टरनेट के माध्यम से नए और युवा कलाकारों की प्रतिभा भी देश के कोने-कोने तक फैल रही है। हम नयी टेक्नोलॉजी का उपयोग करके देश की कला, परम्पराओं और संस्कृति का प्रसार व्यापक रूप से कर सकते हैं। हम सब को भारत की संपन्न और समृद्ध संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। साथ ही, हमें अपनी परम्पराओं में, नए विचारों और नयी सोच को स्थान देना चाहिए, जिससे हम अपने युवाओं और आने वाली परम्परा को भी इन परम्पराओं से जो सकते हैं। हमारे युवा और बच्चे देश की अनमोल विरासत के महत्व को समझें, यह बहुत आवश्यक है।एयरपोर्ट पर किया गर्मजोशी से स्वागत इससे पहले विशेष विमान से नाल सिविल एयरपोर्ट पहुंची महामहराष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का राज्यपाल कलराज मिश्र,केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल,राजस्थान के शिक्षामंत्री डॉ.बीडी कल्ला समेत प्रबुद्धजनों ने समेत गणमान्य लोग उपस्थित थे।

