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बीकानेर में अवैध व्यावसायिक भवनों पर उठे सवाल, सुरक्षा मानकों को लेकर बढ़ी चिंता

बीकानेर में अवैध व्यावसायिक भवनों पर उठे सवाल, सुरक्षा मानकों को लेकर बढ़ी चिंता

 पत्रकार इकबाल खान बीकानेर शहर में व्यावसायिक भवनों की वैधता, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिवक्ता एवं सोशल एक्टिविस्ट मोहम्मद रफीक पठान ने आरोप लगाया है कि शहर में बड़ी संख्या में ऐसे मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, विवाह भवन और होटल संचालित हो रहे हैं, जिनका नगर निगम में विधिसम्मत पंजीयन तक नहीं है। नगर निगम के अनुसार शहर में करीब 75 से अधिक बड़े व्यावसायिक परिसर ऐसे हैं, जो पूर्ण वैधानिक अनुमति के बिना संचालित हो रहे हैं। इन परिसरों में फायर सेफ्टी एनओसी, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की स्वीकृति, वैध बिजली-पानी कनेक्शन, वेंटिलेशन व्यवस्था, पार्किंग, भवन निर्माण स्वीकृति सहित कई जरूरी मानकों का पालन नहीं किया गया है। बताया गया कि कई भवनों के निर्माण की अनुमति किसी अन्य उपयोग के लिए ली गई थी, लेकिन बाद में उन्हें व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया। शहर के कई प्लाज़ा, मॉल और होटल इसी श्रेणी में शामिल बताए जा रहे हैं, जहां नियमों की अनदेखी के बावजूद गतिविधियां जारी हैं।हालिया घटनाओं ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। सिटी कोतवाली क्षेत्र के पास एक मॉल में गैस रिसाव से हुए विस्फोट में करीब 11 लोगों की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया। इसके अलावा के.एम. रोड स्थित एक अन्य मॉल में आग लगने और एक दुकान के ऊपर रसोई में आग लगने की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। विशाल मेगा मार्ट में आग लगने की घटना भी सामने आ चुकी है। अधिवक्ता मोहम्मद रफीक पठान के अनुसार शहर के व्यस्त क्षेत्र में स्थित शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट अब केवल अवैध निर्माण का मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुके हैं। उनका दावा है कि विभिन्न विभागों से प्राप्त सूचनाओं और लिखित जवाबों से यह सामने आया है कि इन दोनों मार्केटों के पास आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं हैं।

नगर निगम के रिकॉर्ड में इन परिसरों से संबंधित वैध निर्माण पत्रावली उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है, वहीं राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पास भी इनसे जुड़ी पर्यावरणीय अनुमति का रिकॉर्ड नहीं बताया गया है।

फायर सेफ्टी को लेकर स्थिति और चिंताजनक बताई गई है। दायर परिवाद के जवाब में फायर अधिकारी ने लिखित रूप में स्पष्ट किया कि शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट को कोई फायर एनओसी जारी नहीं की गई है। तीन मंजिला इमारतों में बड़ी संख्या में दुकानों का संचालन, संकरी गलियां और आपातकालीन निकास की कमी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। पानी विभाग से जुड़ी जानकारी के मामले में भी लापरवाही सामने आई है। सूचना आयोग की सुनवाई के दौरान विभागीय अधिकारी तीन बार नोटिस के बावजूद उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद आयोग ने 15 दिन के भीतर सूचना उपलब्ध कराने के आदेश दिए। जानकारी के अनुसार दोनों मार्केटों पर पानी के लाखों रुपये बकाया हैं।बिजली विभाग के संबंध में भी बताया गया कि शिव प्लाज़ा से जुड़ी वैध पत्रावली उपलब्ध नहीं है, जबकि शिव मार्केट के मामले में तृतीय पक्ष का हवाला देकर सूचना देने से बचने की कोशिश की गई। इन तथ्यों के आधार पर अब शहर में यह मांग उठ रही है कि शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट को तब तक तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए, जब तक सभी वैधानिक अनुमतियां और सुरक्षा मानक पूरे नहीं हो जाते। मोहम्मद रफीक पठान ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो जनहित में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल दो मार्केटों का नहीं, बल्कि बीकानेर शहर की समग्र शहरी व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। शहरवासियों का भी मानना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए।

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