बिना मान्यता चला चैतन्य टेक्नो स्कूल, ना जाने कब खुलेगी शिक्षा विभाग की कुंभकर्ण की नींद लायल पब्लिक स्कूल की मिलीभगत से नियमों की खुलेआम उड़ी धज्जियां
बिना मान्यता चला चैतन्य टेक्नो स्कूल, ना जाने कब खुलेगी शिक्षा विभाग की कुंभकर्ण की नींद लायल पब्लिक स्कूल की मिलीभगत से नियमों की खुलेआम उड़ी धज्जियां 6 करोड़ रूपये सालाना अभिभावकों से ऐंठने का मामला
आईरा समाचार बीकानेर भवानी बीकानेर। दो हज़ार बच्चों की फीस के रूप में 06करोड़ रुपए सालाना के हिसाब से अब तक करीब 18 करोड़ रुपए ले कर लायल पब्लिक स्कूल ने शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में चौंकाने वाला कारनामा किया है, जहां दक्षिण भारत का चर्चित ब्रांड श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल स्थानीय लायल पब्लिक स्कूल संस्था के साथ मिलकर बिना किसी वैधानिक आधार के संचालित किया गया। आरोप है कि मान्यता के लिए आवेदन करने से कई महीने पहले ही विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिए गए, फीस वसूली गई और फर्जी दस्तावेजों के सहारे पूरा तंत्र खड़ा कर दिया गया।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, फरवरी 2023 से ही चैतन्य टेक्नो स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जबकि उस समय तक न तो स्कूल के नाम से कोई मान्यता हेतु आवेदन किया गया था और न ही प्रबंधन अंतरण की कोई वैध प्रक्रिया पूरी हुई थी। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार बिना मान्यता प्रवेश देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
*फर्जी नियुक्तियां, फर्जी मुहर, फर्जी हस्ताक्षर*
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि लायल पब्लिक स्कूल संस्था के सचिव विपिन पोपली ने चैतन्य टेक्नो स्कूल के द्वारा जारी स्टाफ नियुक्ति पत्र लायल पब्लिक स्कूल संस्था के सचिव के रूप में अपनी मुहर और हस्ताक्षर से प्रमाणित किए। सवाल यह है कि जब चैतन्य टेक्नो स्कूल अलग संस्था से है तो उसके द्वारा की गई नियुक्तियों को दूसरी संस्था के नाम से प्रमाणित किस अधिकार से किया गया?? यह कृत्य सीधे तौर पर धोखाधड़ी और जालसाजी की श्रेणी में आता है
मान्यता से पहले फीस वसूली, बैंक खाता भी खुल गया
इतना ही नहीं, चैतन्य टेक्नो स्कूल ने लायल पब्लिक स्कूल का पता दिखाकर एक्सिस बैंक में खाता खुलवाया और मान्यता व नाम परिवर्तन से पहले ही ऑनलाइन फीस भी वसूल ली गई, जबकि उस समय तक परिसर में आधिकारिक रूप से लायल पब्लिक स्कूल ही संचालित थी। यह स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितता और नियमों का खुला उल्लंघन है।
शपथ पत्रों पर भी सवाल
मई 2023 के अंत में ल्याल पब्लिक स्कूल संस्था सचिव के शपथ पत्र विभाग में पेश किए गए, जिन पर भी विपिन पोपली के हस्ताक्षर पाए गए, और उसमें माना गया कि उक्त पते पर ल्याल पब्लिक स्कूल चलाई जा रही है दूसरी और चैतन्य टेक्नो स्कूल भी वहीं संचालित हो रही थी। जबकि न तो प्रबंधन वैष्णवी एजुकेशन ट्रस्ट के नाम विधिवत अंतरण हुआ और न ही स्कूल को मान्यता प्राप्त थी। स्कूल को सितंबर 2023 में मान्यता मिली, जबकि प्रवेश फरवरी में ही दिए जा चुके थे।
*अभिभावक आंदोलित, विभाग मौन*
इन तमाम तथ्यों के सामने आने के बाद अनेक अभिभावक मानसिक रूप से परेशान, व्यथित और आंदोलित हैं। उनका सवाल है कि उनके बच्चों का भविष्य दांव पर लगाकर यह स्कूल आज भी किस आधार पर चल रहा है?
और सबसे बड़े प्रश्न
1.फर्जी दस्तावेज जारी करने के बावजूद लायल पब्लिक स्कूल संस्था सचिव के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं?
2. जब मान्यता और स्कूल संचालन संदेहास्पद है तो तथ्यों से अवगत होते हुए भी विभाग तत्काल कार्यवाही करने से क्यों बच रहा है।
3. एक ही परिसर में दो स्कूल किस नियम के तहत संचालित हैं?
*शिक्षा विभाग की भूमिका संदिग्ध*
इस पूरे प्रकरण में बीकानेर का शिक्षा विभाग भी अजीबोगरीब परिस्थितियों में नजर आ रहा है। स्पष्ट दस्तावेजी साक्ष्यों के बावजूद न तो त्वरित जांच हुई और न ही कोई कठोर कदम उठाया गया। इससे विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि
पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो
दोषी अधिकारियों और प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई की जाए
बिना मान्यता दिए गए प्रवेशों की जवाबदेही तय की जाए
शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले स्कूल अगर इस तरह बदमाशी, हठधर्मिता और धोखाधड़ी का अड्डा बनेंगे, तो इसका खामियाजा सीधे बच्चों के भविष्य को भुगतना पड़ेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है।

