कवि चौपाल से मेरा पुराना नाता रहा है – शाकिर चौपदार, शाकिर व भवानी का सम्मान चौपाल में
कवि चौपाल से मेरा पुराना नाता रहा है – शाकिर चौपदार,
शाकिर व भवानी का सम्मान चौपाल में
आईरा बीकानेर बीकानेर। राष्ट्रीय कवि चौपाल की 551 वीं “कड़ी मौन करें संकट गौण” विषय पर समर्पित रही रविवार के कार्यक्रम की अध्यक्षता में प्रमोद शर्मा, मुख्य अतिथि में हनुमंत गौड़, विशिष्ट अतिथियों में प्रभा कोचर, साकिर हुसैन, भवानी सिंह आदि मंच सुशोभित हुए, कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि मौन एक है पर सिद्धियां अनेक, इसका जुनुनी सफर प्रभो सान्निध्य तक आनन्ददायी रहता है, अर्थात मौन साधक को ऋषि बना देता है। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने उपनिषदों में वर्णित मौन की महत्ता पर बाद बौद्धिक के मौन पर काव्य “अब बन जाना मुझे मुनि है, नहीं व्यर्थ का कहना है” आध्यात्म रचना की प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि इं हनुमंत गौड़ ने जानवर अब सब कहां वहशी रहे, इन्सान भी इन्सान सा दिखता नहीं, व मै किसी हालात से डरता नहीं, शायद किसी बात पर अड़ता नहीं। प्रभा कोचर : ना कोई होड़ ना बराबरी है, एक नाव के दो पतवार है। इससे पूर्व प्रमोद शर्मा ने ईश वंदना की। मधुरिमा सिंह : अगर आपको अमृत पीना है तो मौन अपनाइये…, शिव प्रकाश दाधिच बीकानेरी : चारा खाकर दुध पिलाती ऐसी मेरी गौ माता…,
के .के. व्यास शिल्पी : वह फरियाद लेकर आया है, निश्चय ही डर में नहीं, इसलिए खारिज कर दी…, राजकुमार ग्रोवर : नारी लक्ष्मी, नारी सरस्वती, नारी दुर्गा और सीता है। नारी है गुरु ग्रन्थ साहिब नारी बाइबिल कुरान और गीता है कविता पर वाह वाह की गूंज उठी।
इसी बीच साहित्य अनुरागी पत्रकार साकिर हुसैन व भवानी सिंह शिवबाड़ी का राष्ट्रीय कवि चौपाल में शाल श्रीफल माल्यार्पण द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया व द्वारा मोमेंटो भेंट किया, साकिर हुसैन ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय कवि चौपाल से मेरा पुराना नाता है, इसके सर्व
विकास को आतूरता रहती है, सम्मानित भवानी सिंह ने बताया कि साधना को सम्मान मिलता अतः अथक साधना संलग्न रहना है…, पवन चड्ढ़ा : ओ दूर के मुसाफिर हमको भी साथ ले ले, हम रह गये अकेले गीत सुनाकर सदन का मन मोह लिया।
आज के कार्यक्रम में किशनलाल, शिव प्रकाश शर्मा, छोटू खां आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे तथा 16 महानुभाव के रचनाएं प्रस्तुति हुई, कार्यक्रम का संचालन साधक ने किया… आभार प्रकट करते हुए ओम प्रकाश भाटी ने कहा कि मौन अपनाओ तत्काल सुखी बन जाओ।

